इसे संयोग ही कहा जाएगा कि अपने गाए छठ गीतों से लोक गायिकी के शिखर तक पहुंचने बाली शारदा सिन्हा ने छठ पूजा के पहले दिन इस नश्वर संसार से सदा के लिए प्रस्थान किया। बिहार की लोक गायिका शारदा सिन्हा का मंगलवार देर रात दिल्ली एम्स में निधन हो गया। 72 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली। छठ पर्व के मौके पर उनके निधन से बिहार समेत पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है। वह पिछले लंबे समय से बीमार चल रहीं थीं। मीडिया और शोसल मीडिया पर उन्हे श्रद्धांजलि देने बालों का तांता लग गया । देश- दुनिया में उनके लाखों प्रशंसक शोक संतप्त हैं ।
शारदा सिन्हा का जन्म बिहार के सुपौल जिले में एक अक्टूबर 1952 को हुआ था।
संगीत की देवी और ‘बिहार की स्वर कोकिला’ के रूप में अपनी पहचान बनाने वालीं पद्मश्री से सम्मानित शारदा सिन्हा का निधन दिल्ली के एम्स अस्पताल में मंगलवार की रात निधन हो गया। छठ गीतों को घर-घर तक पहुंचाने वाली 72 वर्षीय शारदा सिन्हा छठ महापर्व के पहले दिन नहाय-खाय पर ही छठी मंईयां की गोद में निर्वाण को प्राप्त हुईं। वे 11 दिनों से एम्स में भर्ती थीं। वे बीते छह वर्षों से ब्लड कैंसर से जूझ रही थीं।
बीते दिनों उनकी तबीयत बिगड़ने पर 26 अक्टूबर को एम्स में भर्ती कराया गया था। मंगलवार की देर रात उनके बेटे अंशुमन सिन्हा ने इंटरनेट मीडिया पर पोस्ट कर मां शारदा सिन्हा के निधन की जानकारी दी। उनके निधन से कला जगत में शोक की लहर है।
एक अक्टूबर 1952 को बिहार के सुपौल जिले के हुलसा गांव में शारदा सिन्हा का जन्म हुआ था। हिंदी, मैथली, भोजपुरी, बज्जिका समेत अन्य भाषाओं में कई सदाबहार गीत गाने वाले लोक गायिका को भारत सरकार की ओर से पद्मश्री व पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था। गायिका शारदा सिन्हा को वर्ष 2018 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।
महापर्व छठ के आरंभ होने से चार दिन पूर्व उन्होंने छठ गीत दुखवा मिटाई छठी मैया, रऊए आसरा हमार.. जारी किया था। एम्स अस्पताल से ही उनके बेटे ने गीत को इंटरनेट मीडिया पर जारी कर लोगों को छठ की शुभकामना दी थी। गायिका शारदा सिन्हा को वर्ष 2018 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था ।
शारदा सिन्हा द्वारा छठ पूजा पर आधारित गीत ” हो दीनानाथ.. ” को लोगों ने खूब पसंद किया था। बेमिसाल शख्सियत शारदा सिन्हा को बिहार कोकिला के अलावा भोजपुरी कोकिला, भिखारी ठाकुर सम्मान, बिहार रत्न, मैथिली विभूति सहित कई सम्मान मिले हैं।
इसी वर्ष 22 सितंबर को शारदा सिन्हा के पति ब्रजकिशोर सिन्हा का 80 वर्ष की उम्र में ब्रेन हेम्ब्रेज के कारण निधन हो गया था। पति के निधन के बाद शारदा सिन्हा धीरे-धीरे कमजोर होते चली गईं थीं। तबीयत बिगड़ने के बाद शारदा सिन्हा को दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अक्टूबर में जब उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, तो उनकी खाने-पीने की आदतों में भी समस्या आने लगी थी।
लोक गायकी के अलावा, शारदा सिन्हा ने हिंदी सिनेमा में भी अपनी आवाज से जादू बिखेरा। उन्होंने 1989 में फिल्म मैंने प्यार किया के गीत “काहे तोसे सजना” गाकर सबका दिल जीत लिया। इसके अलावा गैंग्स आफ वासेपुर में उनके गाए “तार बिजली” और हम आपके हैं कौन का “बाबुल जो तुमने सिखाया” जैसे गीत उनकी मधुर आवाज का प्रमाण हैं। इन गीतों ने उनकी लोकप्रियता में चार चांद लगा दिए।
उनका महाशून्य में विलीन हो जाना देश और समाज की अपूरणीय क्षति है ।आज बे हमारे मध्य नहीं हैं ,मगर अपने मधुर गीतों के माध्यम से बे गीत और संगीत की दुनिया में सदैव अमर रहेंगी ।
साभार – सुरेश बाबू मिश्रा
साहित्य भूषण