बरेली। उत्तर प्रदेश के शहरी स्थानीय निकायों में कार्यरत कर्मचारियों की विद्यमान लम्बित समस्याओं का निराकरण न होने की दशा में चरणवद्ध आन्दोलन किये जाने को लेकर ज्ञापन संयुक्त नगर आयुक्त को सौंपा गया। बता दें की शहरी स्थानीय निकायों में कार्यरत कर्मचारियों की अनेको समस्याएं काफी समय से लम्बित हैं। जिस हेतु वर्षो से अनेकों पत्र शासन व प्रशासन को प्रेषित किया जा रहा है। परन्तु उस पर कोई भी कार्यवाही नही हो रही है, जिससे निकाय कर्मचारियों में काफी रोष है। इसी विरोध के चलते निकाय कर्मचारियों द्वारा विरोध स्वरूप हाथ में काला फीता वाँध कर कार्य किया गया तथा द्वितीय चरण में समस्त कर्मचारी अपने गेट पर मीटिंग कर मुख्यमंत्री को सम्बोधित करते हुए अधिशासी अधिकारी / प्रभारी महोदय के माध्यम से अपनी मांगो का ज्ञापन प्रेषित किया।
जिसमें उनकी प्रमुख मांगें थीं निकायों में कार्यरत 24 फरवरी 2016 के शासनादेश के अनुसार दिसम्बर 2001 तक के समस्त दैनिक, वर्कचार्ज एवं संविदा कर्मचारियों के विनियमितीकरण का आदेश जारी नही हुआ जिसे शीघ्र जारी किया जाए। अकेन्द्रीयत सेवा नियमावली शीघ्र प्रख्यापित करायी जाय। वेतन समिति 2008 के 8वें प्रतिवेदन में प्रदेश के उ०प्र० पालिका (केन्द्रीयत) राजस्व सेवा के कर एवं राजस्व संवर्ग के वेतन के पुर्नगठन शासनादेश सं0-1254/9-4-10-2 नियम/05 दिनांक 22 अप्रैल 2010 को नगर निगम की भाँति जलकल विभाग के राजस्व निरीक्षक कर्मचारियों पर भी लागू किया जाय।
विभिन्न नगर निगमों, नगर पालिका परिषदों, नगर पंचायतों एवं जलकल / जल संस्थानों में कार्यरत नायब मोहर्रिरों, पौण्ड मोहर्रिरों, स्लाटरहाउस मोहर्रिरों, कर समहार्ताओं एवं करनिरीक्षक-2 (मोहर्रिरों) को केन्द्रीयत सेवा के अन्तर्गत राजस्व निरीक्षक के पद पर सवीलीनीकरण के लिए निदेशालय द्वारा भेजे गए प्रस्ताव का शासनादेश शीघ्र जारी किया जाय।
स्थानीय निकायों में लिपिकीय संवर्ग के कर्मियों की वेतन विसंगति को दूर करते हुये उन्हे राज्य सरकार के लिपिक संवर्ग के कर्मियों की भाँति पदनाम व वेतनमान प्रदान किया जाय। सामूहिक बीमा पालिसी जी.एस.एल.आई.सी. बन्द हो जाने के कारण नव नियुक्त कार्मिको का वीमा पालिसी बन्द हो गयी है उसे पुनःलागू कराया जाय।
74 वॉ संविधान संशोधन में की गई समस्त व्यवस्था निकायों में लागू किया जाय। संविदा सफाई पर भर्ती किए गए कर्मचारियों को नियमित किया जाय तथा राज्य कर्मचारियों की भाँति उन्हे रागस्त सुविधाएं दी जाय। संविदा सफाई कर्मियों की भाँति अन्य संवर्गा जैसे-जलकल, मार्गप्रकाश, उद्यान एवं कार्यालयों में भी चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों पर भर्ती शीघ्र किया जाय। नगर निगमों, नगर पालिका परिषदों एवं नगर पंचायतों में कार्यरत आउटसोर्स श्रगिकों को शासनादेशों के तहत रााप्ताहिक अवकाश सहित समस्त अवकाश, सामाजिक सुरक्षा कानून लागू करते हुए रागस्त श्रमिकों के वेतन से काटे गए गविष्यनिधि का पैसा उनके खाते में जमा किया जाय तथा उन्हे प्रतिगाह सगय से वेतन भुगतान किया जाय।
वर्षों से कार्यरत कम्प्युटर आपरेटर्स के पदों को सृजित करते हुए उनकी नियमित मर्ती की जाय। आउटसोर्सिग (ठेका प्रथा) समाप्त की जाय। तथा वर्षों से कार्यरत उक्त कार्मिकों को विभागों में समायोजित किया जाय। पुरानी पेंशन बहाल किया जाय। वर्ष 1989 के दैनिक वेतन कर्मचारी जो 2011 में नियमित हुए थे उनकी सेवा को जोड़ते हुए पूरानी पेंशन का लाभ दिया जाय। पालिकाओं के सेवानिवृत्त कर्मचारियों से प्रतिमाह जीवित प्रमाण पत्र लेना बन्द किया जाय, उनसे केन्द्रीयत कर्मचारियों की भाँति वर्ष में एक बार ही जीवित प्रमाण पत्र लिया जाय, एवं आन लाइन पेंशन भुगतान सुनिश्चित किया जाय। राज्य वित्त आयोग से मिलने वाली बजट राशि को बढ़ाया जाय। मृत संविदा सफाई कर्मियों के आश्रितों को मृतक आश्रित का लाभ दिया जाय। माली पदनाम को बदलकर उपवन रक्षक पदनाम किया जाय। प्रत्येक माह की 5 तारीख तक सभी कार्मिकों का वेतन तथा पेंशन का भुगतान सुनिश्चित किया जाय। जलसंस्थन बांदा में कार्यरत समूह’ध’ श्रमिक (पम्प चालक), ड्राइवर, चौकीदार, सफाई कर्मी, वाल्व मैन आदि को जलसंस्थान झॉसी की तरह वर्तमान में जारी शासनादेश संख्या- 3727/9-1-2024-1861456 दिनांक 07.11.2024 नगर विकास अनुगाग-1 के अनुसार पारिश्रमिक भुगतान किया जाय।
